Sunday, March 20, 2011

होली

होली के हुडदंग में, भूल के सब कुछ यार.
गुझिया, रंग, गुलाल औ यारां की भरमार.

सोनू मोनू, संटी बंटी है सब रंग में डूबे.
भिगो रहा है कोई किसी को भगा कोई बिन जूते.

फिकर नहीं है किसी बात की यार यही है होली.
रोज नहीं क्यों बन पाती है हम यारो की टोली.

रंग हमें है यही बताते, लाल हरे नीले और पीले.
जीवन को रंगीन बनाओ, मिटा द्वेष चिंता की कीलें.

आओ सब मिल करे प्रतिज्ञा दिल न किसी का तोड़ेंगे.
मर्यादा बंधन के अन्दर इक दूजे को जोड़ेंगे.

Saturday, March 12, 2011

जिंदगी

सागर की गहराइयो से लेकर आसमान की उचाइयो में
ढूंडा उसे जिसे मैं जानता तक नहीं,
परछाइयों से लेकर शुरुमुयी शाम तथा पहाडो से
पूछा उसे जिसे मैं जानता तक नहीं
 
आज रात पूनम की, और चाँद हँसता है
पूंछता है मुझसे कहाँ खोये हो?
ठंडी हवाए सहलाते हुए गालों को
पूंछती है मुझसे कितना रोये हो?
 
मै हूँ की चुपचाप बेपरवाह
अपनी ही रौ में बहते हुए,
जिंदगी जीने की मजबूरी लिए
जिंदगी ही ढूंढता फिर रहा हूँ.