Saturday, January 28, 2012

'चुनाव'

है 'चुनाव' का समय और गहमा गहमी अब भारी है.
उनका तौ देख्यो पांच साल अबकी तौ हमरो बारी है.
गली गली मा मोटर से वोटर का जाय रिझावत है,
लड़के बच्चे बिस्कुट टाफी बुढऊ खुब दारु पावत है.
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कोई कहत अबसे चाउर चीनी औ तेल न ब्लैक होई
कितनो गरीब परिवार सही सोये न भूखा पेट कोई.
है कोई कहत रोजगार देब लड़िकन का मुफ्त देब शिक्षा,
कर्जा तोहार हम माफ़ करब बस ओट के मागित है भिक्षा.
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जाति धरम औ छेत्र गोत्र रिश्ता नाता सब जोरत है
पाप भरी विष कै गगरी दोसरे के मूडे फोरत है.
छल कपट प्रपंच औ धमकी कै एको न कोई चाल बची
जो वोट ना मिला तौ देख्यो तोहरो ना कौनो हाल बची
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ना कोई विकास कै बात करे बुनियादी ढांचा गायब है
सड़क और बिजली पानी पूछब  इनसे नाजायज है
अस्पताल बने कुछ एक लेकिन डाक्टर ना देखेन कबौ वहां
स्कूल नहीं पढ़ने  कि जगह केवल नेता अब बने वहां
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पहिचान करो विषहीन है कि विषदंत छुपाये है भीतर
सब एक थाली कै बैगन है बस लड़त है जैसे ये तीतर
है यक अपील तुहसे भैया मौका फिर आए दिनन बाद
है एक वोट तुहरो भैया अपने ओटे कै रखो लाज............

Friday, January 27, 2012

भारत माता के मंदिर में

वृन्दावन की कुञ्ज गली में
नागफनी जो बोते है,
मर्यादा इस देश की लेकर
छार सिन्धु में धोते है.
मानवता है सिमट रही
जिनकी काली करतूतों से,
सज्जनता मुह छिपा के रोती
डरी हुई है दूतो से.
बर्बरता की हड्डी जिनके
दांतों में है फसी हुई,
उग्रवाद की भीषण ज्वाला
जिनके दृग में धंसी हुई.
जिनके मन को मजा आ रहा
बस्ती सुघर जलाने में,
लगे हुए है देश की ऊँची
कुर्सी को हथियाने में.
लोकतंत्र की पावनता में
अत्याचारी मत रखना,
भारत माता के मंदिर में
उन्हें पुजारी मत रखना.

Saturday, May 28, 2011

राजनीति

छोटा  बोला विज्ञान छोड़ मै राजनीत में जाउंगा.
कुछ ही दिन में मै ए राजा और कलमाड़ी बन जाऊँगा.
देश धर्म, संस्कृति विरासत, इनको दूर भागाउंगा.
जयललिता या कनिमोझी, जैसी को घर में लाऊंगा.

साइंस और टेक्नोलोजी, की सब बाते बेमानी है.
डाक्टर, वैज्ञानिक, साहित्यकार इनकी तो दिखती नानी है
दिन रात एक्विसन साल्व करे, क्या लाभ और क्या हानि है
सुश्री बहन जी के आगे आखिर  सब भरते पानी है.

भैया मेरा अब एडमीशन राजनीत शाश्त्र में करवाओ
अपना मेरा और भाभी का लाकर नोटों से भरवाओ
गर मिली मुझे अच्छी बीवी खुद लाकर भर कर लायेगी.
भाग्य अगर फूटे होंगे, वापस मैके को जायेगी.

तो हुआ फैसला अब आगे साइंस नहीं पढ़ना मुझको
आइन्स्टीन राबर्ट हूक, सुश्रुत नहीं बनना मुझको.
भौतिकी रसायन जीव वनस्पति मैथ नहीं पढ़ना मुझको
राजनीति शाश्त्र अब पढ़ करके है बस नेता बनना मुझको.




Sunday, March 20, 2011

होली

होली के हुडदंग में, भूल के सब कुछ यार.
गुझिया, रंग, गुलाल औ यारां की भरमार.

सोनू मोनू, संटी बंटी है सब रंग में डूबे.
भिगो रहा है कोई किसी को भगा कोई बिन जूते.

फिकर नहीं है किसी बात की यार यही है होली.
रोज नहीं क्यों बन पाती है हम यारो की टोली.

रंग हमें है यही बताते, लाल हरे नीले और पीले.
जीवन को रंगीन बनाओ, मिटा द्वेष चिंता की कीलें.

आओ सब मिल करे प्रतिज्ञा दिल न किसी का तोड़ेंगे.
मर्यादा बंधन के अन्दर इक दूजे को जोड़ेंगे.

Saturday, March 12, 2011

जिंदगी

सागर की गहराइयो से लेकर आसमान की उचाइयो में
ढूंडा उसे जिसे मैं जानता तक नहीं,
परछाइयों से लेकर शुरुमुयी शाम तथा पहाडो से
पूछा उसे जिसे मैं जानता तक नहीं
 
आज रात पूनम की, और चाँद हँसता है
पूंछता है मुझसे कहाँ खोये हो?
ठंडी हवाए सहलाते हुए गालों को
पूंछती है मुझसे कितना रोये हो?
 
मै हूँ की चुपचाप बेपरवाह
अपनी ही रौ में बहते हुए,
जिंदगी जीने की मजबूरी लिए
जिंदगी ही ढूंढता फिर रहा हूँ.